गोवर्धन पूजा

*निषादराज के दोहे*
विषय - गोवर्धन पूजा
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शुभ दीवाली मानकर,अगला दिन जब आय।
गोबर  गोवर्धन   बना, पूजा  रीत  निभाय।।

इंद्र  देव   क्रोधित  हुए, वर्षा  खूब  कराय।
ब्रज की रक्षा  के लिए, पर्वत दियो उठाय।।

नर-नारी तब खुश हुए,छप्पन भोग चढ़ाय।
फिर गोवर्धन कृष्ण की,पूजा दिये कराय।।

परम्परा  यह  देश  की, कोई  भूल  न पाय।
पीढ़ी दर पीढ़ी चले, युग-युग चलता जाय।।

दीपावली   सुहावनी,   जनमानस   हर्षाय।
गोवर्धन पूजा करे,आत्म शांति सब पाय।।
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रचनाकार:-
बोधन राम निषादराज"विनायक"
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)
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