मेघालय दर्शन

मेघालय राज्य

6~ वर्ग 6-भौगोलिक सौन्दर्य
कोड नं.M-6
38-पशु
39 -पक्षी
40-पुष्प
41-वृक्ष
42- पर्यटन स्थल
43-बाँध
44. प्रदेश की सीमाएँ

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दोहा - भौगोलिक सौंदर्य

भारत माँ की गोद में,पावन है वह स्थान।
मेघालय की चोटियाँ,लगे स्वर्ग का भान।।

चौपाई -

भारत  के  पूर्वोत्तर  है  स्थित । मेघालय है राज्य व्यवस्थित।।
स्कॉटलैंड    जैसी     सुंदरता । जितना देखो मन नहि भरता।।

मेघालय    की  चोटी   सुन्दर । है शिलांग अद्भुत इस भू पर।।
नोकरेक   पर्वत  अति  न्यारा । भारत  दर्शन   शान   हमारा।।

उमनगोत   बहती  है  नदिया । शीशें   जैसी  लगती बढ़िया।।
है  शिलांग  की  जीवन  रेखा । आस  पास  हरियाली  देखा।।

पहाड़ियों  की  शोभा   न्यारी । हरी - भरी  वादी  भी  प्यारी।।
एक  बार  इस  भू  पर आता । नित्य  देखने  को मन भाता।।

सबसे  बड़ा  प्रान्त   पूर्वोत्तर । पारंपरिक  हाट अति सुंदर।।
अलग-अलग  गाँवों  से आते । मिलकर सब बाजार लगाते।।

(38) - पशु
दोहा -
पशु देखो सुन्दर यहाँ,विचरण करते साथ।
इन पर कोई  भी सुनों, नहीं उठाते हाथ।।

चौपाई -

निर्भिक  होकर  वन  में  चरते । नहीं  किसी  से ये  सब डरते।।
भिन्न - भिन्न  नश्लों  के   रहते । सर्दी - गर्मी   सबको   सहते।।

राजकीय  पशु   धूमिल  जानो । सबसे   सुन्दर  तुम  पहचानो।।
वन   में   पांडा    भालू   हाथी । भैंस  हिरण  रहते  सब साथी।।

सूअर   और    कई   नरवानर । गौर    सिवेट    नेवले वनचर।।
रासू     कृंतक   है   चमगादड़ । वन में करते मिलकर भगदड़।।

चूना    पत्थर     बने   गुफाएँ । अजगर    बैठे   मुँह  फैलाए।।
सरीसृपों  में   छिपकलियाँ भी । करते   सभी   रंगरलियाँ  भी।।

मगरमच्छ   कछुए   हैं  आते । कॉपरहैड   ग्रीन   ट्री   भाते।।
वाइपर्स  कोरल  अति  सुन्दर । प्रजातियाँ  इनके इस भू पर।।

(39) पक्षी
दोहा -

ग्रेट इन्डियन हार्नबिल,मेघालय की शान।
पक्षी यह सबसे बड़ा,मैना इसकी जान।।

राजकीय    पक्षी   को  जानो । इसे    पहाड़ी    मैना   मानो।।
पूर्वोत्तर    में    मेघालय   की । इज्जत है यह राज्यालय की।।

दुर्लभ - दुर्लभ   पक्षी    रहते । मेघालय  में अक्सर  दिखते।।
तोते   और    मयूरा    तीतर । उड़ते  रहते  कानन  भीतर।।

तितली भी  सुन्दर  है लगती । रंगोली  सी इस पर खिलती।।
मँडराती   रहती   फूलों   पर । बागों   में  वन में  झूलों पर।।

विविध  प्रजाति  रंग के होते । नीड़  बनाकर  सब है सोते।।
चूँ - चूँ - चूँ - चूँ   करते  गाते । नीलगगन  पर  शोर मचाते।।

सैर करें हम मिलकर आओ । कभी डराओ नहीं  सताओ।।
सुंदरता  की   मूरत     पक्षी । मन की  भोली सूरत  पक्षी।।

(40) पुष्प
दोहा -

सुन्दर - सुन्दर  वादियाँ, रंग - बिरंगे फूल।
मेघालय की सैर को,कभी न जाना भूल।।

चौपाई -

मनमोहक   खेती    फूलों  की । कितनी   सुंदरता   झूलों  की।।
जा   कर     देखो     चेरापूंजी । खुशियों का यह अद्भुत कुंजी।।

आर्किड  फूल महकती सुन्दर । खुशबू से भर जाती  अक्सर।।
रंग - बिरंगी   तितली  उन पर । मँडराती  रहती  है  दिन भर।।

गेलड़िया   खेती    फूलो  की । लगन - सेहराई    झूलों   की।।
फूल   यहाँ   केसरिया   पीली । कई किस्म कुछ  होती नीली।।

गेंदा  और   गुलाब   यहाँ  पर । कृषक  उगाते   खेतों  सुन्दर।।
सभी  दाम  भी  अच्छा  पातें । खुश होकर के समय बितातें।।

41) वृक्ष
दोहा -

मेघो का आलय यही,मेघालय है नाम।
वृक्ष यहाँ घनघोर है,करते पूरण काम।।

चौपाई -

मौफलांग वन  है अति सुन्दर । खासी  हिल्स जिले के अंदर।।
पावन   है  यह   क्षेत्र  पुरातन । संरक्षित  सरकारी   है    वन।।

विविध प्रजाति वृक्ष  का डेरा । देवी - देवों     करते     फेरा।।
ग्राम  समूहों   की    निगरानी । कोई   नहि  करते    नादानी।।

वृक्षारोपड़   करते   मिलकर । खुशी मनाते सब हैं खिलकर।।
चेरापूंजी      वर्षा       धानी । सबसे ज्यादा पानी -  पानी।।

रबर  पेड़ की  बिछती  जालें । बरगद  जैसी  इसकी  छालें।।
जीवित  पूल   बनाते   इनसे । नदिया   पार   कराते  इनसे।।

अलग  पेड़ जड़ से हैं  बनते । धरा  दूर  जा करके  तनते।।
नए पेड़ फिर विकसित होते । फूलों से  वन  सुरभित होते।।

(42) पर्यटन स्थल
दोहा -

मेघालय की  गोद में, चेरापूंजी  स्थान।
पर्यटकों को मोहते,भारत की है शान।।

चौपाई -

पहाड़ियों   की   सुन्दर  वादी । मानो   कोई   है    शहजादी।।
देखो  निर्मल   नदिया  झरने । सुंदरता  का   क्या  है कहने।।

मौसिनराम  स्वर्ग सम जाना । शिवलिंगम आकार समाना।।
यह स्थल मन को हरने वाला । मेघालय का स्थान निराला।।

तुरा पर्यटन स्थल अति सुन्दर । यहीं  हिल्स  गारो  हैं भू पर।।
नोकेरेक    पार्क   है    न्यारा । तुरा शहर  भी अद्भुत प्यारा।।

भारत का हिल स्टेशन पहला । है  शिलांग  नहले  पे  दहला।।
पर्यटकों   के  मन  को   भाते । शैलानी  सब   खुशी   मनाते।।

नोंगपोह  का  दर्शन  लो  कर । मेघालय का यह स्थल सुन्दर।।
उत्तर  हिल  में   पूर्वी   खासी । सब   आते   हैं   भारतवासी।।

43) बाँध
दोहा -

पनबिजली परियोजना,मेघालय की शान।
जयंतिया की हिल्स पर,प्रस्तावित निर्माण।।

चौपाई -

उमंगोट      मेघालय    भू  पर । नदी  एशिया  की  यह सुन्दर।।
नीर   संग्रहण    बाँध   बनाना । पनबिजली    संयंत्र   लगाना।।

गाँव-शहर  फिर तो  चमकेगा । उद्योगों   में   श्रम   महकेगा।।
मेघालय   की    शान   बढ़ेगी । ऊर्जा  खातिर  नहीं  झुकेगी।।

लोगों    को   उद्योग    मिलेंगे । खुशियों का फिर फूल खिलेंगे।।
सभी  आत्मनिर्भर फिर  होंगे । उजियारा हर घर  फिर  होंगे।।

उमियम झील जलाशय सुन्दर । बारापानी      नाम    मनोहर।।
पूर्वोत्तर    की   जीवन   धारा । दृश्य मनोरम अतिशय प्यारा।।

दो  सौ  बीस   वर्ग  विस्तारित । बड़ा  जलाशय पानी  धारित।।
है  शिलांग  से  कुछ  ही   दूरी । इसे   देखना   बहुत   जरूरी।।

(44) प्रदेश की सीमाएँ
दोहा -

उत्तर-पूरब में असम, दक्षिण  बांग्लादेश।
पश्चिम भी इस ओर है,सुन्दर है परिवेश।।

चौपाई -

मेघालय   मेघों   का  आलय । राज्य पहाड़ी पास हिमालय।।
उत्तर - पूर्वी  असम   सुहाना । दक्षिण    बांग्लादेश  मुहाना।।

सात बहिनियों में यह शामिल । पूर्वोत्तर  अपने  में   काबिल।।
एक  विशाल  पठारी  है  यह । नदी  घाटियाँ   धारी  है  यह।।

कुछ  विवाद होते सीमा  पर । फिर भी ताल-मेल है सुन्दर।।
दक्षिण-पश्चिम  गारो  हिल है । सीमा पर ना अब मुश्किल है।।

दक्षिण-पश्चिम खासी हिल भी । सबके मिलते रहते दिल भी।।
ऊँच    पहाड़ी   सीमा   काटे । आपस  में   देशों   को  बाँटे।।

जयंतिया  हिल   पूर्वी   रेखा । दुर्गम   घाटी   किसने  देखा।।
असम राज्य की सीमा जाओ । सुंदरता अद्भुत  लख आओ।।

                  समापन दोहा
भारत को जानो सभी,यह है ग्रन्थ महान।
गाथा पावन देश की,महिमा गुंजित गान।।

छंदकार:-
बोधन राम निषादराज"विनायक"
व्याख्याता वाणिज्य विभाग
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम
पिन कोड नं. - 491995
राज्य - छत्तीसगढ़
देश - भारत


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