माँ वसुंधरा

माँ वसुंधरा (लावणी छंद)
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इस माटी की चरण वन्दना,
                हम सब मिलकर गाते हैं।
अश्रु नीर से पग प्रच्छालन,
                 माथे तिलक लगाते हैं।।

वसुंधरा माँ के आँचल को,
                 आज सँवारें मिल करके।
गुलशन सा महके हर हर कोना,
                 छाय बहारें खिल करके।।
ताल सरोवर भरे लबालब,
                        सूरज नया उगाते हैं।
इस माटी की चरण वंदना..............

हरि भरी ये प्यारी धरती,
                    सबके मन को भाती है।
हमें बचाओ मेरे बच्चों,
                    कहकर हमें बुलाती है।।
मैला आँचल कभी न होवे,
                       चन्दा सा चमकाते हैं।
इस माटी की चरण वंदना................

पालन करती है जन-जन की,
                   सबको अन्न खिलाती हैं।
गंगा की निर्मल जल धारा,
                  प्यासों को पिलवाती हैं।।
करते इसकी हैं आराधन,
                ऋषि मुनि महिमा गातें हैं।।
इस माटी की चरण वंदना...............
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रचनाकार:-
बोधन राम निषादराज"विनायक"
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)

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