ममता का सागर
माँ ममता का सागर (नवगीत)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
माँ मेरी ममता का सागर,
जग में तुम्हीं महान हो।
मेरा सब कुछ है तुमसे ही,
ईश्वर का वरदान हो।।
मुझे धरा पर लाने वाली,
रखती आँचल छाँव में।
होती है तेरी पूजा माँ,
काँटा गड़े न पाँव में।।
स्नेह सुधा बरसाने वाली,
ऐसा हिंदुस्तान हो।
माँ मेरी ममता का सागर,..............
इनकी पकड़ ऊँगली मैंने,
चलना सीखा प्यार से।
दूध पिलाकर माँ ही मेरी,
जोड़ दिया परिवार से।।
बचपन पायी ममता पाया,
देव तुल्य भगवान हो।
माँ मेरी ममता का सागर,..............
प्रेम मयी करुणा की मूरत,
सकल ज्ञान भंडार है।
तेरे ही चरणों में माता,
मेरा यह संसार है।।
मेरा यह सम्मान तुम्हीं से,
तुम मेरा अभिमान हो।
माँ मेरी ममता का सागर,...............
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचनाकार:-
बोधन राम निषादराज"विनायक"
सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)
Comments
Post a Comment