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Showing posts from August, 2022

बाल कविता संग्रह- चन्दा मामा

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बाल कविता संग्रह 2021 (चन्दा मामा) (छत्तीसगढ़ी मात्रिक रचना) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (1) सरस्वती दाई दाई    ओ     वरदान दे। वीणा  के  सुर  तान दे।। मँय  अड़हा  हँव शारदा, मोला   थोकन   ज्ञान दे। आखर  जोत  जलाय के मोर  डहर  ओ  ध्यान दे। जग मा नाम कमाय बर, मोला  कुछ  पहिचान दे। तोरे     चरन     पखारहूँ, सेवक  ला ओ  मान दे।। ~~~~~~~~~~~~~~~ (2) गुरु वंदना पइँया   लागँव   हे  गुरुवर। रद्दा   रेंगँव   अँगरी   धर।। चरण - शरण मा आए हँव। तुँहरे  गुन  ला   गाए  हँव।। मँय  अड़हा  अज्ञानी  जी। दौ  अशीष  वरदानी  जी।। जग   के    तारनहारी  जी। जावँव मँय  बलिहारी जी।। पार   लगादौ   नइया  जी। गुरुवर लाज  बचइया जी।। ~~~~~~~~~~~~~~~~ (3) हाथी दादा पहन   पजामा   हाथ...

विघ्नहर्ता गणेश

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विघ्नहर्ता गजानंद (गीतिका गीत) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 2122 2122 2122 212 विघ्नहर्ता श्री गणेशा,देव तुम संसार के। लाज तेरे हाथ में अब,दीन हम लाचार के।। प्रार्थना स्वीकार करना,हे गजानन दास हम। भक्ति करते हैं तुम्हारी,रख हृदय विश्वास हम।। भक्त तेरे आज दर पे,आ गये थक हार के। लाज तेरे हाथ में अब,दीन हम लाचार के।। बुद्धि के तुम हो प्रदाता,ज्ञान हमको दीजिये। कष्ट जो भी हैं हमारे,आप सब हर लीजिये।। विघ्न बाधा दूर कीजै,आप सेवकदार के। लाज तेरे हाथ में अब,दीन हम लाचार के। हे तनय गौरी शिवा के,काम बिगड़े सब करो। दुःख हर्ता तुम विनायक,दुःख जन-जन के हरो।। द्वार तेरे हैं खड़े हम,जिंदगी से हार के। लाज तेरे हाथ में अब,दीन हम लाचार के। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ रचनाकार:- बोधन राम निषादराज"विनायक" सहसपुर लोहारा,जिला-कबीरधाम(छ.ग.)

जग ले सरग नँदावत हे

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जग ले सरग नँदावत हे (लावणी छंद) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जम्मों रुखराई ठुड़गा अब,                      हरियर पेड़ कटावत हे। सुख दे दिन अब सपना संगी,                     जग ले सरग नँदावत हे।। पेड़ लगाबो मिल के हम सब,                      पर्यावरण बचाबो अब। लइका जइसे सेवा करबो,                  तभे सुखी रह पाबो अब।। बरसा कइसे होही भइया,                      बादर घलो सुखावत हे। जम्मों रुखराई ठुड़गा अब,............. बर-पीपर अउ आमा अमली,                   गहना हावय भुइयाँ बर। सुरताये बर इही ठिकाना,                      जाँगर के पेरइया बर।। बिन रुखवा के सबो डोंगरी,                    बंजर बन चिकनाव...

श्रम की महिमा

श्रम की महिमा (16/13) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ श्रम की महिमा क्या बतलाऊँ,                          श्रम से ही संसार है। श्रम से ही फल मीठा मिलता,                     श्रम जीवन आधार है।। श्रम न रहे गर तो क्या होगा,                         ऊँचे बाँध ढलान का। बड़े-बड़े पुल-सड़क कहाँ से,                       कैसे स्वप्न मकान का।। श्रम से ही उद्योग हमारा,                         श्रम से ही व्यापार है। श्रम की महिमा क्या बतलाऊँ............ हल न चलें खेतों में सोंचों,                    सोने का फिर तोल क्या। भूखी मर जायेगी दुनिया,                  पानी का फिर मोल क्या।। मेहनती इंसान वही है,         ...

ममता का सागर

माँ ममता का सागर (नवगीत) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ माँ मेरी ममता का सागर,                   जग में तुम्हीं महान हो। मेरा सब कुछ है तुमसे ही,                     ईश्वर का वरदान हो।। मुझे धरा पर लाने वाली,                    रखती आँचल छाँव में। होती है तेरी पूजा माँ,                      काँटा गड़े न पाँव में।। स्नेह सुधा बरसाने वाली,                           ऐसा  हिंदुस्तान हो। माँ मेरी ममता का सागर,.............. इनकी पकड़ ऊँगली मैंने,                     चलना सीखा प्यार से। दूध पिलाकर माँ ही मेरी,                     जोड़ दिया परिवार से।। बचपन पायी ममता पाया,                   ...

जीवन की बगिया

जीवन की बगिया (लावणी छंद) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जीवन की बगिया को यारों,                रखना हरदम हरियाली। फूल खिलेंगे रंग बिरंगे,                आएँगी फिर खुशहाली।। प्रेम प्यार से इसे सींचना,                      कभी न मुरझाने पाये। पतझड़ का मौसम आये भी,                    ये बहार बनकर छाये।। गुलशन महके भौंरा गाये,                   कोयल कुहके मतवाली। जीवन की बगिया को यारों............ चमन बने घर अपना सारा,                   रहे महकता मधुबन हो। पंछी चहके घर आँगन में,                हर्षित अपना तन-मन हो।। रिश्तों में सम्बन्ध समेटे,                      ऐसा हो घर का माली। जीवन की बगिया को यारों..............    जलें ...

माँ वसुंधरा

माँ वसुंधरा (लावणी छंद) ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ इस माटी की चरण वन्दना,                 हम सब मिलकर गाते हैं। अश्रु नीर से पग प्रच्छालन,                  माथे तिलक लगाते हैं।। वसुंधरा माँ के आँचल को,                  आज सँवारें मिल करके। गुलशन सा महके हर हर कोना,                  छाय बहारें खिल करके।। ताल सरोवर भरे लबालब,                         सूरज नया उगाते हैं। इस माटी की चरण वंदना.............. हरि भरी ये प्यारी धरती,                     सबके मन को भाती है। हमें बचाओ मेरे बच्चों,                     कहकर हमें बुलाती है।। मैला आँचल कभी न होवे,                        चन्दा सा चमकाते हैं। इस माटी की ...

धरती की सन्तान

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धरती की सन्तान ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ धरती की संतान सभी हैं,                मिलजुल हाथ बटाना है। नेक कर्म अपनाले प्राणी,                जग में नाम कमाना है।। बढ़ता चल इस जीवन पथ पर,                  रुकना नहीं निराशा में। निश्छल बहती सरिता जैसी,                 चलना लेकर आशा में।। दीन दुखी गर राह मिलेंगे,                    संग उसे भी लाना है। धरती की सन्तान.............. हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,                      सब में भाईचारा हो। धरती की क्यारी लहराएँ,               उपवन अपना प्यारा हो।। मानवता में जिएँ मरे हम,                  मानव धर्म निभाना है।। धरती की संतान................ कठिन राह या पर्वत घाटी,           ...

अमर रहे गणतंत्र हमारा

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अमर रहे गणतंत्र हमारा (ताटंक छंद) अमर रहे गणतंत्र हमारा,                 जन-गण-मन का नारा है । आसमान पर देख तिरंगा,                     विश्व गगन का तारा है।। सदियों से हम ठोकर खाएँ,                    मिली आज आजादी ये। चलो सहेजे अपनी धरती,                   अब मत हो बर्बादी ये।। वसुंधरा माँ की आँचल को,                       हमने आज सँवारा है। अमर रहे गणतंत्र हमारा............ शस्य श्यामला हरी-भरी हो,                      बंजर धरती की क्यारी। जय जवान का नारा गूँजे,                  अमन चैन की किलकारी।। है सशक्त विज्ञान हमारा,                    दुश्मन को ललकारा है। अमर रहे गणतंत्र हमारा........... वीर शह...

मेघालय दर्शन

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मेघालय राज्य 6~ वर्ग 6-भौगोलिक सौन्दर्य कोड नं.M-6 38-पशु 39 -पक्षी 40-पुष्प 41-वृक्ष 42- पर्यटन स्थल 43-बाँध 44. प्रदेश की सीमाएँ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ दोहा - भौगोलिक सौंदर्य भारत माँ की गोद में,पावन है वह स्थान। मेघालय की चोटियाँ,लगे स्वर्ग का भान।। चौपाई - भारत  के  पूर्वोत्तर  है  स्थित । मेघालय है राज्य व्यवस्थित।। स्कॉटलैंड    जैसी     सुंदरता । जितना देखो मन नहि भरता।। मेघालय    की  चोटी   सुन्दर । है शिलांग अद्भुत इस भू पर।। नोकरेक   पर्वत  अति  न्यारा । भारत  दर्शन   शान   हमारा।। उमनगोत   बहती  है  नदिया । शीशें   जैसी  लगती बढ़िया।। है  शिलांग  की  जीवन  रेखा । आस  पास  हरियाली  देखा।। पहाड़ियों  की  शोभा   न्यारी । हरी - भरी  वादी  भी  प्यारी।। एक  बार  इस  भू  पर आता । नित्य  देखने  को मन भाता।। सबसे...